Sunday, May 8, 2011







माँ को खोना

कल रात खबर आई
माँ अब नहीं रही

सारे बंधन तोड़कर
सारे लगाव छोड़कर
वो अब चली गई ।

माँ जब नहीं रही
तो याद आती हैं उसकी बातें
उसके सुनाये किस्से, कहानी
कविताएं, मन्त्र और श्लोक
जो याद थे उसको जबानी ।
माँ अब नहीं रही, तो याद आते हैं 
माँ के बनाए, बेसन के लड्डू, 
मठरी और अचार 
दीवाली की गुझिया, 
होली के कांजी बड़े
पूर्णमासी का पंचामृत 
तीज त्योहार ।



माँ के दिए लड्डू गोपाल
मंदिर में बैठे-बैठे
जाने क्यों मुस्कुराते हैं
और उन्हें नहलाती, 
कपड़े पहनाती
भोग लगाती, 
भजन गुनगुनाती
माँ की याद दिलाते हैं ।

माँ अब नहीं है
तो याद आती हैं
माँ की अनगिन बातें
कितनी सूनी लगती हैं
विदेश में ये रातें ।

माँ जो चली गई
तो खाली हो गया मित्र, 
मन का एक कोना
इतना सरल नहीं है
कंगारूओं के देश में
माँ को यों खोना ।



 रेखा राजवंशी
2007


Thursday, April 21, 2011

Moonlight चांदनी

चांदनी 


रात गहरी है
बिखरती जा रही है
कसक सी बन चांदनी
।

रात ठहरी है
कि गुपचुप गा रही है
गीत जैसे चांदनी।

याद के दो पल

सितारे बन गए हैं
शब्द सारे
भाव में फिर बंध गए हैं
पीर मेरी
रात रानी बन बिछी है
तुम कहीं शायद चले आओ
कि तुम बिन
बावरी सी फिर रही है चांदनी।

रात गहरी है
बिखरती जा रही है
कसक सी बन चांदनी


वो गुज़रता वक्त

जैसे थम गया है
रात का दामन
महक से भर गया है
आज मन में
याद के गज़रे सजे हैं
तुम कहीं महसूस कर पाओ
कि तुम बिन
आग जैसी 
तप  रही है चांदनी ।

रात गहरी है
बिखरती जा रही है 
 कसक सी बन चांदनी ।


 
 रेखा राजवंशी

Sunday, April 10, 2011

अघोरी मन

अघोरी मन 

जाने कब मन
अघोरी हो जाता है
आधी रात को
श्मशान में बैठ
यादों की अग्नि
जलाता है ।

मंडराने लगते हैं
चारों ओर
भटकती आत्माओं से
गुज़रे पल,
वशीकरण मन्त्र
पढ़ने लगते हैं ओंठ
लौटने लगते हैं
बीते कल

दिखने लगते हैं
अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो
खेलते बचपन के साथी,
दिखता है स्कूल में
आलू की टिक्की बेचता चंदा,
और दिखता है चश्मा लगाए
क्यारियाँ रोपता माली चोखेलाल,
और तब माँ की
आवाज़ आती है
'चलो खाना खा लो'

थम जाते हैं
अचानक सारे तंत्र
याद नहीं रहते
कोई भी मन्त्र,

व उड़ जाते हैं
चीखते -चिल्लाते,
यादों के भूत

दिखने लगता है
पूजावनत माँ का
पवित्र रूप
और जाने कब
भटकता तड़पता 
 अघोरी मन
बन जाता है जोगन ।


रेखा राजवंशी 

Sunday, April 3, 2011

Holi Hullad Charity Event, Sydney Part 2 (25th March 2011)


Holi Hullad Charity Event, Sydney Part 1 (25th March 2011)


ऑस्ट्रेलियाई पाठ्यक्रम में हिन्दी जोड़ने के लिए अभियान



ऑस्ट्रेलियाई पाठ्यक्रम में हिन्दी जोड़ने के लिए अभियान

इन दिनों ऑस्ट्रेलियावासी भारतीय समुदाय में इस बात को लेकर खलबली मची हुई है कि नए राष्ट्र स्तरीय 'भाषा पाठ्यक्रम(अकारा ACARA -Australian Curriculum Assessment and Reporting Authority)  में हिन्दी का कहीं नामोनिशान नहीं है । इस पाठ्यक्रम में भाषा पाठ्यक्रम ड्राफ्ट किया गया है और इसमें अंग्रेज़ी के अतिरिक्त ग्यारह सामुदायिक भाषाएँ रखी गई हैं, जिन्हें छात्र वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ सकते हैं। इन भाषाओं का चयन देश में भाषा की मांग के आधार पर किया गया है, चूँकि भारतीय अंग्रेजी समझ व बोल लेते हैं इसलिए भारतीय भाषाओं को इसमें नहीं जोड़ा गया है ।
ये भाषाएँ तीन अवस्थाओं में विकसित की जाएंगी, पहली अवस्था में चाइनीज़ और इटालियन भाषाओं को चुना गया है, इनके चुनने का आधार है कि वे अंग्रेज़ी के अतिरिक्त देश की प्रमुख भाषाएँ हैं और बहुत संख्या में छात्र इनका अध्ययन करते हैं । दूसरी अवस्था में सम्मिलित होने वाली भाषाएँ हैं - फ्रेंच, जरमन, इंडोनेशियन , कोरियन और स्पेनिश । इनको चुनने के पीछे जो तर्क दिया गया है उसके अनुसार ये भाषाएँ ऑस्ट्रेलया के विद्यालयों में पहले से पढ़ाई जा रही हैं और और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं । तीसरी अवस्था में विकसित होने वाली भाषाओं में शामिल हैं- ग्रीक, अरबी और वियतनामी । इनको पाठ्यक्रम में इसलिए रखा गया है क्योकि ये ऑस्ट्रेलिया निवासियों के घरों में बोली जाती हैं ।
भारतीय समुदाय का कहना है कि सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का स्थान दूसरा है, और हिन्दी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है अतः हिन्दी को भी पाठ्यक्रम में स्थान मिलना चाहिए । पहली बार ऑस्ट्रेलिया के समस्त प्रान्तों के लोग प्रादेशिक भाषाओं को बीच में न लाते हुए इस मुद्दे को लेकर एकमत हुए हैं कि हिन्दी भी अन्य भाषाओं की तरह ही पाठ्यक्रम का एक भाग होना चाहिए । ‘ऑस्ट्रेलिया हिंदी कमेटी’ के नाम से एक कमेटी का गठन किया गया है,  और सामूहिक अपील की कोशिश की जा रही है, यह अपील अगले सप्ताह जमा की जाएगी ।  अब तक अकारा की वेबसाईट पर फीडबैक की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें सैकड़ों ऑस्ट्रेलियन भारतीयों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं ।
ऑस्ट्रेलियन सरकार भी हिन्दी के महत्त्व को जानती है, इसीलिए शनिवार को चलने वाले कम्युनिटी लैंग्वेज स्कूल्स में हिन्दी को स्थान भी दिया गया है, परन्तु राष्ट्रीय स्तर पर दैनिक विद्यालयों में हिन्दी को स्थान नहीं मिल पाया है. इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं, एक तो भारतीयों के घरों में बोले जाने वाली अनेक क्षेत्रीय भाषाएँ, दूसरे जनसंख्या गणना के समय प्रदान की गई सूचना में संकोच या शर्म के कारण भारतीयों द्वारा हिन्दी का उल्लेख न करना व भारतीयों की अंग्रेज़ी अच्छी होना ।  जो भी हो पर खुशी इस बात की है कि सम्पूर्ण ऑस्ट्रेलिया के भारतीय अपनी भाषा को पाठयक्रम में स्थान दिलाने को लेकर चेत गए हैं तथा आशा है कि उनकी सामूहिक आवाज़ सरकार के कानों तक अवश्य पहुंचेगी ।
इस बारे में जो भी परिणाम होगा आपको उससे अवगत कराया जाएगा ।


रेखा राजवंशी
सिडनी, ऑस्ट्रेलिया

Sunday, March 6, 2011

International Women's Day - a poem - नारी मुक्ति



नारी मुक्ति

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
स्त्री अधिकारों के चर्चे
स्वतंत्रता के नारे
और नारी मुक्ति का युद्ध
सब एक ओर है ।

दूसरी ओर हैं
सुबह से शाम तक
काम में रत
कमला, विमला और शांति
जो क्रान्ति का अर्थ नहीं जानतीं ।

उनके लिए
जीवन की इति है
चूल्हा-चौका, मजदूरी
छोटे बच्चों का पेट भरना
और रात को
शराबी पति के
अत्याचारों का शिकार बनना ।

विरोध क्या है? स्वतंत्रता क्या होती है?
यह सब सोचने का वक्त किसके पास है?
बच्चे बड़े हो जाएँ
अच्छी नौकरी पा जाएँ
मात्र यही आस है ।

एक दिन मैंने कमला से पूछा
क्यों अत्याचार सहती हो?
सारे दिन चूल्हे की
लकड़ी सी जलती हो
क्यों क्रांति नहीं करतीं?
उसने अचरज से मुझे देखा, बोली
'यह क्रान्ति क्या होती है?
क्या यह हमें खाना देगी? पानी देगी?
भूखे बच्चों का पेट भरेगी?
यदि नहीं तो क्रांति का क्या अर्थ है?
हमारे लिए यह व्यर्थ है ।


इन दो अतिसीमाओं
विरोधाभासों में घिरा मन
ढूंढता है हल कहाँ है?
फिलहाल यह अध्याय खोलने से पूर्व
कुछ और समस्याओं को सुलझाना है

कैसे कहें कि नारी मुक्ति का ज़माना है
कैसे कहें कि
नारी मुक्ति का ज़माना है ।

रेखा राजवंशी
'अनुभूति के
गुलमोहर' की एक कविता  
1996


Saturday, February 26, 2011

2011 NSW Premier's Indian subcontinent community awards

 


सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में 18 फरवरी की शाम गवर्नमेंट हाउस में न्यू साउथ वेल्स की प्रीमियर क्रिस्टीना कनीली ने भारतीय सबकॉन्टिनेंट कम्यूनिटी अवार्ड से भारतीय मूल के छः व्यक्तियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया ।


इन अवार्ड्स की घोषणा पिछले साल नवम्बर में दीवाली के कार्यक्रम के दौरान पार्लियामेंट हाउस में की गई थी और इनके लिए नामांकन दिसंबर में खुला था । अवार्ड की घोषणा के पीछे एक ही उद्देश्य था कि उन लोगों के कार्य का सम्मान किया जाए जिन्होंने किसी भी क्षेत्र में अपना योगदान दिया है, मुख्य रूप से जिन पांच क्षेत्रों की घोषणा की गई वे थे  ट्रेड और इंडस्ट्री, आर्ट और कल्चर, कम्यूनिटी हार्मनी, और लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड।

इस कार्यक्रम में गवर्नमेंट हाउस में अनेक जाने-माने लोग उपस्थित थे, जिनमें भारत के कौंसल जनरल अमित दासगुप्ता के अलावा भारतीय विद्या भवन के गंभीर वाट्स, अन्य संस्थाओं के संचालक और मीडिया के लोग भी थे। आकर्षण की बात ये भी थी कि प्रीमियर क्रिस्टीना कनीली ने भारतीय परिधान यानि साड़ी पहनी थी, जो हल्के नीले रंग की थी और जिसमें वे बेहद सुन्दर लग रहीं थीं । प्रवासी भारतीयों ने उनके इस प्रयास की तहे दिल से प्रशंसा की, ज़ाहिर है कि प्रीमियर ने सबका दिल जीत लिया । हल्के खान-पान के बीच ही प्रीमियर का भाषण शुरू हुआ निस्में उन्होंने कहा कि न्यू साउथ वेल्स में करीब
100 ,000 भारतीय मूल के निवासी हैं, जो ऑस्ट्रेलिया के समाज का एक महत्वपूर्ण अंग हैं । समुदाय के लोगों ने अनेक क्षेत्रों में अपना योगदान दिया है जैसे शिक्षा, व्यवसाय, कला और सार्वजनिक सेवाएं और भारतीय मूल के लोग वाकई में हमारे समाज का महत्वपूर्ण अंग हैं । प्रीमियर ने अवार्ड जीतने वाले लोगों को न्यू साउथ नेल्स सरकार की ओर से बधाई देते हुए कहा कि नौकरी और परिवार में संतुलन करते हुए समाज के लिए कुछ कर पाना वाकई प्रशंनीय है।
2011 के अवार्ड जीतने वाले व्यक्ति थे:
श्री चंद्रू तुलानी- जिन्हें ट्रेड और इंडस्ट्री के लिए सम्मानित किया गया, चंद्रू तुलानी 1975 में ऑस्ट्रेलिया आए और अपनी मेहनत से सबसे बड़े इम्पोर्टर बन गए, उन्होंने होटल व्यवसाय में भी सफलता पाई।
आर्ट्स और कल्चर का अवार्ड मिला सिडनी की जानी-मानी एस बी एस रेडियो के हिन्दी विभाग की प्रोड्यूसर कुमुद मीरानी को, जो समय-समय नाटक और कला के क्षेत्र में योगदान देती रही हैं, कुमुद मीरानी को अपनी रेडियो डोक्यूमेंटरीज़ के लिए पहले भी एशिया पैसिफिक ब्रोडकास्टिंग यूनियन अवार्ड और इंटरनैशनल एशियन रेडियो अवार्ड भी मिल चुके हैं ।
कम्यूनिटी हार्मनी का अवार्ड मिला श्री पवन लूथरा को जो इन्डियन लिंक समाचार पत्र के सम्पादक तो हैं ही,  अन्य सामुदायिक क्षेत्रों में भी अपना योगदान देते रहते हैं, इन्डियन लिंक समाचार पत्र के माध्यम से पवन हर विषय पर एक संतुलित दृष्टिकोण लोगों तक पहुंचाते रहे हैं ख़ास कर भारतीय विद्यार्थियों के साथ हुई घटनाओं के मामले में । इसके अलावा कॉमनवेल्थ खेलों या यूरेनियम जैसे मुद्दों को भी उन्होंने अच्छी तरह से लोगों तक पहुंचाया था ।
लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड दो लोगों को दिया गया जिनमे एक थे डा० सिधालिंगेश्वर ओरिकोंडे और डा० गुरचरण सिंह सिधू, जिन्होंने पिछले कई सालों से समुदाय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।
एक युवा छात्र मोहित तुलानी को कम्यूनिटी सर्विस अवार्ड मिला । मोहित ने अनेक स्वैच्छिक प्रोजेक्ट्स में, विभिन्न संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण काम किया है और आजकल वह मल्टीकल्चरल यूथ नेटवर्क का सक्रिय सदस्य है, पहले भी उसे अनेक अवार्ड मिल चुके हैं ।


बाद में डा० एंड्रयू मक्डोनाल्ड, जो कि पार्लियामेंट्री फ्रेंड्स ऑफ़ इंडिया के सह-संयोजक हैं, ने अवार्ड विजेताओं को बधाई दी और कहा कि भारतीय प्रवासियों के काम की सराहना करने की दिशा में यह एक प्रयास है ।
भले ही अगले महीने होने वाले चुनावों के मद्देनज़र सरकार ने यह कदम उठाया है, और शायद भारतीय प्रवासियों के वोट लेने के लिए उन्हें खुश किया गया है, जो भी कुछ हो पर भारतीय समुदाय ने कठिन परिश्रम करके ऑस्ट्रेलिया में जो जगह बनाई है और जो नाम कमाया है उसी के चलते आज सरकार उन्हें सम्मानित कर रही है । यहाँ तक कि प्रीमियर ने अपने चुनाव अभियान में हिन्दी का एक वाक्य 'मुझे  आपका सहयोग चाहिए' बोलकर सबको चमत्कृत किया है । चूंकि ऑस्ट्रेलिया एक बहु-सांस्कृतिक समाज है, जिसमें अनेक देशों के लोग रहते हैं और करीब साठ मुख्य भाषाओं के अलावा कई अन्य भाषाएँ भी बोली जाती हैं, इसीलिये इस चुनाव-अभियान का प्रचार हिन्दी के साथ-साथ कुछ अन्य भाषाओं में भी अनुवादित कराया गया है । इस बार नए साल के फायर वर्क्स के मौके पर भी हार्बर ब्रिज पर अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में लिखा गया 'सिडनी में आपका स्वागत है', राजनीति कहें या बहु-संस्कृतिवाद, पर ये तो मानना पड़ेगा कि भारतीय समुदाय एक शक्ति के रूप में उभर रहा है और इसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता, और जाने-अनजाने ही पर हिन्दी का प्रचार  भी हो ही रहा है ।



रेखा राजवंशी
सिडनी ऑस्ट्रेलिया

Sunday, February 20, 2011

Bauhinia vahlii flowers कचनार के फूल एक नया गीत

     कचनार के फूल

  फूल फिर खिलने लगे कचनार के
  आ गए हैं दिन पुराने, प्यार के ।

  छेड़ना, रोना, झिझकना, रूठना
  आ गए दिन मान के, मनुहार के ।




  भाये आईने में खुद को देखना
  आ गए दिन साज के, श्रृंगार के ।

  हाथ में मेंहदी मिलन की रच गई
  द्वार फिर खुलने लगे अभिसार के ।

 मन बना चन्दन सुगन्धित हो गया
 दूर सब शिकवे हुए संसार के ।



रेखा राजवंशी 

Sunday, February 13, 2011

Love and Osho, On Valentines Day




ओशो और प्रेम


शायद सच है
कि घृणा ही प्रेम है
और प्रेम ही घृणा ।

ओशो ने कहा था
कि जिससे हम प्रेम करते हैं
उससे ही घृणा भी करते हैं।
और आशा जब बदलती है
निराशा में
तो हम दुखी होते हैं
अपनी उपेक्षा पर रोते हैं ।
मूर्खता है, प्रेम में
प्रतिदान की आशा करना
बेहतर
है प्रेम से
दूसरों की झोली भरना।

और तब मैं अपनी
मूर्खता पर पछताती हूँ
और तुम्हें बहुत करीब पाती हूँ
और पुनः तुमसे
प्रेम करने लगती हूँ ।